हिंदी में: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग
काम: यह भारत सरकार की वो संस्था है जो देश के सभी कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज के लिए नियम बनाती है और उन्हें फंड (पैसा) देती है।
नई दिल्ली: इसी महीने UGC ने कॉलेजों के लिए कुछ नए नियम (Rules) बनाए हैं ताकि जाति के आधार पर होने वाले भेदभाव को रोका जा सके। लेकिन इन नियमों को लेकर देशभर में हंगामा मच गया है।
छात्र, बड़े-बड़े अफसर और साधु-संत इसे "काला कानून" (Black Law) कह रहे हैं। बरेली के एक बड़े अफसर (City Magistrate) ने तो गुस्से में अपनी नौकरी से इस्तीफा (Resign) तक दे दिया है।
आखिर इन नियमों में ऐसा क्या लिखा है जिससे 'जनरल कैटेगरी' (General Category) के लोग इतना डरे हुए हैं? आइए आसान भाषा में समझते हैं।
सबसे बड़ा पंगा ये है कि नया नियम सिर्फ SC, ST और OBC छात्रों को सुरक्षा देता है।
- सवाल: जनरल कैटेगरी (General Category) के छात्रों का कहना है— "अगर कॉलेज में हमारे साथ रैगिंग हुई या किसी ने जाति के नाम पर हमें परेशान किया, तो हम कहां जाएंगे?"
- डर: छात्रों को डर है कि इस नियम से कॉलेजों में "उल्टा भेदभाव" शुरू हो जाएगा और जनरल वाले बच्चे बिना किसी सुरक्षा के रह जाएंगे।
UGC ने कहा है कि हर कॉलेज में एक "इक्विटी स्क्वॉड" (Equity Squad) बनेगा। यह एक ऐसी टीम होगी जो हॉस्टल, कैंटीन और क्लासरूम में घूमती रहेगी।
नए नियम में लिखा है कि अगर किसी टीचर का व्यवहार "अजीब" लगा (Implicit Bias), तो उसे भी भेदभाव माना जाएगा। अब टीचर्स को डर है कि अगर उन्होंने किसी छात्र को पढ़ाई न करने पर डांट दिया या नंबर कम दिए, तो छात्र उन पर "जातिगत भेदभाव" का आरोप लगा सकते हैं। इससे पढ़ाई का माहौल खराब हो सकता है।
2012 के पुराने नियमों में लिखा था कि अगर कोई छात्र "झूठी शिकायत" करता है, तो उसे सजा मिलेगी। लेकिन 2026 के नए नियमों में से यह लाइन हटा दी गई है।
इसका मतलब यह हुआ कि अगर कोई छात्र किसी टीचर या दूसरे छात्र पर बदला लेने के लिए झूठा केस कर दे, तो शिकायत करने वाले का कुछ नहीं बिगड़ेगा। इसे लोग "ब्लैकमेल" का जरिया मान रहे हैं।
— अलंकार अग्निहोत्री (इस्तीफा देने वाले अफसर, बरेली)
इस कानून के विरोध में बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने अपनी सरकारी नौकरी छोड़ दी। वहीं, अयोध्या और प्रयागराज के बड़े-बड़े साधु-संतों ने भी सरकार को चेतावनी दी है कि इस कानून को वापस लिया जाए।
📌 निष्कर्ष: अब आगे क्या?
UGC का मकसद भेदभाव रोकना था, जो कि अच्छी बात है। लेकिन इसका तरीका ऐसा होना चाहिए जिससे "सभी छात्रों" को सुरक्षा मिले, चाहे वो किसी भी जाति के हों। अगर झूठी शिकायतों पर रोक नहीं लगी, तो कॉलेजों का माहौल खराब हो सकता है। अब देखना यह है कि क्या सरकार इन नियमों में बदलाव करती है या नहीं।

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